युवाओं के प्रेरणा स्रोत – डॉ. एस. एन. सुब्बाराव
वरिष्ठ गांधीवादी, युवाओं के प्रेरणा स्रोत डॉ. एस एन सुब्बाराव, जिन्हें दुनिया भाई जी के नाम से जानती है , का जीवन सत्य, प्रेम, करुणा, देशभक्ति , सादगी और सरलता की बेमिसाल नज़ीर था। उनसे मेरी पहली मुलाकात बाबा आमटे के सोमनाथ शिविर में 1988 में हुआ था। मैंने देखा एक आकर्षक व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति शांतचित्त से पत्र लिखने में व्यस्त मेरे बगल में बैठा है।सामने मंच पर बाबा आमटे और उनके सहयोगी बैठे थे। कार्यक्रम चल रहा था । उत्सुकता बस मैंने अपना नोटबुक बढ़ाया। उन्होंने ऑटोग्राफ दिया, फिर पत्र लिखने में व्यस्त हो गए। थोड़ी देर में मैंने देखा मंच से उन्हें बुलाया गया। वे अपने सुपरिचित अंदाज में सुमधुर गीत एवं वक्तव्य से पूरे शिवरार्थियों के दिल – दिमाग पर छा गए। बाद में उस वर्ष के अंत में भारत जोड़ो साइकिल यात्रा में उनके साथ दो महीने रहने का अवसर मिला । तब से जीवनपर्यंत भाई जी का मार्गदर्शन और प्रेम मुझे मिलता रहा।
डॉ. एस. एन. सुब्बाराव का जन्म 7 फरवरी, 1929 को बेंगलुरु में हुआ था । उनके पिता वकील थे। पिताजी की इच्छानुसार उन्होंने वकालत की पढ़ाई की । वे छात्र जीवन में ही राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए। 1942 में सड़कों पर नारा लिखने के अपराध में उन्हें गिरफ्तार किया गया , लेकिन उम्र कम होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया । कांग्रेस सेवा दल के प्रमुख एन. एस. हार्डिकर की पारखी नजर उन पर पड़ी । वकालत की पढ़ाई पूर्ण करने के बाद उन्होंने भाई जी को दिल्ली बुला लिया। इस प्रकार वे कांग्रेस सेवा दल से जुड़ गए। कांग्रेस सेवा दल में उनका संपर्क उस समय के सभी प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं से हुआ, जिनमें प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, जो उनसे बहुत प्रभावित थे, कांग्रेस अध्यक्ष कामराज, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई आदि शामिल थे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस सेवा दल का बहुत विस्तार किया। उसे नया आयाम दिया। जिससे तात्कालिक राष्ट्रीय नेताओं का ध्यान भाई जी की ओर गया।
गांधी शताब्दी वर्ष में गांधी दर्शन रेल यात्रा के वे निदेशक बनाए गए और उन्होंने पूरे देश की रेल से यात्रा की । इस दौरान उन्हें कुछ राशि प्राप्त हुआ, जिसका उपयोग उन्होंने चंबल घाटी के शांति सद्भावना के कार्य में लगाने का निश्चय किया। उन्होंने जौरा, मुरैना, म. प्र. में महात्मा गांधी सेवा आश्रम की स्थापना की। चंबल घाटी में शांति और सद्भावना एवं रचनात्मक कार्य शुरु किया। जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चंबल घाटी में शांति – सद्भावना का कार्य शुरू हुआ तो भाई जी ने उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसके फलस्वरूप घाटी में 654 बागियों का समर्पण तीन चरणों में हुआ। उनके पुनर्वास के लिए भाई जी ने महत्वपूर्ण कार्य किया। जिससे क्षेत्र में सदियों से व्याप्त हिंसा से लोगों को निजात मिला। जो काम सरकारें नहीं कर पायी ,उस कार्य को गांधीवादियों ने अहिंसा के बल पर करने में सफलता पायी, जो किसी चमत्कार से कम नहीं था। उल्लेखनीय है कि बागियों का समर्पण महात्मा गांधी सेवा आश्रम जौरा में हुआ था।
जब कांग्रेस का विभाजन हुआ, तब उन्होंने किसी गुट में जाने के बजाय राष्ट्रीय युवा योजना के माध्यम युवाओं के बीच कार्य शुरु किया। उनका कहना था कि मेरा सभी से मधुर संबंध है, इसलिए किसी गुट में जाने के बजाय उन्होंने स्वतंत्र कार्य प्रारंभ किया। भाई जी ने राष्ट्रीय योजना के तहत शिविर के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित करने, उन्हें रचनात्मक कार्यों से जोड़ने एवं राष्ट्र सेवा के प्रति प्रेरित करने का कार्य प्रारंभ किया। इस कार्य को वे जीवनपर्यंत करते रहे।
जब देश का माहौल विषाक्त हो रहा था, सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं बढ़ रही थी,तब भाईजी ने अपनी पूरी शक्ति शांति – सद्भावना के कार्य में लगा दिया। सद्भावना रेल यात्रा पूरे देश में निकाली। उसके माध्यम से युवक- युवतियों को संस्कारित करने और शांति- सद्भावना के कार्य में लगाने का कार्य किया। संभवत आधुनिक भारत के वे एकमात्र व्यक्ति थे, जिन्होंने दो बार पूरे देश की रेल यात्रा का नेतृत्व किया। पहली बार 1969 में गांधी शताब्दी वर्ष में और दूसरी बार 1993 -95 सद्भावना रेल यात्रा के माध्यम से।
जहां कहीं भी सांप्रदायिक हिंसा हुई या प्राकृतिक आपदा आयी भाई जी अपने स्वयंसेवकों के साथ हमेशा उपस्थित रहे। चाहे भागलपुर का सांप्रदायिक दंगा हो या गोधरा कांड या ताज होटल में आतंकवादी हमला या कंदमाल की हिंसा या उत्तराखंड, लातूर या कच्छ का भूकंप सब जगह भाई जी जी अपने युवा टोली के साथ शांति सद्भावना और सेवा के लिए मौजूद रहे। उन्हें युवाओं में अटूट विश्वास था। वे कहते थे कि जब आदमी बीमार पड़ता है तो डॉक्टर के पास जाता है , जब देश बीमार पड़ता है तो उसका इलाज तो युवाओं के पास है। इसलिए वे जीवन पर्यन्त युवाओं को प्रशिक्षित करने ,उनके अंदर देश -प्रेम, राष्ट्रीय एकता, शांति और सद्भावना के कार्य के लिए प्रेरित करते रहे। उन्हें रचनात्मक कार्यों से जोड़ने में लगे रहें। उसी का परिणाम है कि आज देश के हर कोने में उनके द्वारा प्रशिक्षित युवा मिल जाएंगे। सिर्फ देश में ही नहीं, विदेशों में भी उनके द्वारा प्रशिक्षित लोग भरे पड़े हैं। इतिहास में ऐसे अनेक महापुरुष हुए जिन्होंने युवाओं को एक या दो बार बड़े बदलाव के लिए प्रेरित किया , लेकिन सुब्बाराव जी ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने आजीवन युवाओं को प्रेरित किया। भाई जी गरीबी मुक्त, बेरोजगारी मुक्त, हिंसा मुक्त, नशा मुक्त खुशहाल, समृद्ध और मजबूत भारत का निर्माण करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने युवाओं को इसका वाहक चुना था।
भाई जी के महानिर्वाण के बाद वर्ष 2023 में बिहार में राष्ट्रीय योजना के तत्वाधान में 2 अक्टूबर, 2023 से 27 अक्टूबर , 2023 तक भीतिहरवा, चंपारण से पटना तक बिहार के 26 जिलों के 1500 किलोमीटर की भाई जी संदेश साइकिल यात्रा निकाली गई थी। इस यात्रा में राष्ट्रीय युवा योजना के सचिव रन सिंह परमार ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा धर्मेंद्र भाई, कार्यालय प्रभारी, नरेंद्र भाई, निदेशक भारत की संतान, राष्ट्रीय युवा योजना के ट्रस्टी सुकुमारन, मधु भाई आदि की भागीदारी महत्वपूर्ण थी। साथ ही साथ बिहार के राष्ट्रीय युवा योजना परिवार के साथियों ने इस आयोजन की अगुवाई की। इस यात्रा में राष्ट्रीय युवा योजना परिवार से जुड़े देश भर के युवाओं ने भरपूर सहयोग दिया। अशोक भारत इस यात्रा के संयोजक थे। भाई जी के महानिर्वाण दिवस पर पटना में 27 अक्टूबर, 2023 को यात्रा का समापन हुआ। इस अवसर पर पटना में राष्ट्रीय एकता शिविर का आयोजन राष्ट्रीय युवा योजना ने किया था। जिसमें देशभर के लगभग 250 शिवरार्थियों ने भाग लिया था।
भाई जी आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनका जीवन, कार्य ,और संदेश युवाओं को हमेशा प्रेरित और मार्गदर्शन करता रहेगा। वह अपने जमाने की जीवित गांधी थे । विनोबा ने कहा था कि कहा था ‘प्यार बांटने में मैं फर्क नहीं करता’। यह भाई जी के जीवन में देखने को मिला । क्या बच्चे ,क्या युवा, क्या वयस्क सब के साथ एक जैसा व्यवहार, यह उनकी विशेषता थी। आज जब देश कठिन परिस्थिति से गुजर रहा है, ऐसे में भाई जी का राष्ट्रीय एकता, देशप्रेम , शांति और सद्भावना का संदेश हमारे लिए प्रेरक और तारक हो सकता है।
अशोक भारत
8709022550

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